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पुस्तक ‘जागती स्मृतियाँ’ मानव जीवन की एक संघर्ष-पूर्ण गाथा है। यह पुस्तक नायिका के जीवन में आए हर्ष, शोक-विषाद, कठिन और संघर्ष भरे जीवन को अक्षरशः पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने में सक्षम है। जहां यह पुस्तक नायिका के विपरीत परिस्थितियों में उच्च मनोबल को दर्शाती है वहीं कैंसर जैसे रोग से लड़ने की उनकी जिजीविषा भी व्यक्त करती है। बाल्यकाल में ही मां के असाध्य रोग के कारण परिवार की जिम्मेदारियाँ, छोटे भाई की मानसिक बीमारी और मां की मृत्यु के बाद पिता सहित परिवार की देखभाल करना प्रसंशनीय है। पुरूष प्रधान समाज तथा उस समय की विधवाओं के अमानवीय जीवन का सटीक वर्णन मन को छ जाने वाला है। बालिका बुआ राधारानी को अमानुषिक कठोर विधवा बीवन की बाध्यता के कारण उनके हृदय और वाणी की कटुता में व्यक्त होती थी जोकि अस्वाभाविक नही कहा जा सकता है।
प्रेम करने वाला सच्चे जीवन-साथी की भूमिका भी उल्लेखनीय है। सुसंस्कृत संतान भी बुझारू व्यक्तित्व का परिणाम हैं। यह पुस्तक पाठकों की जिज्ञासा को बढ़ाने और शांत भी करने में सफल रहेगी।
I am Kaberi Chattopadhyay, born and brought up in the state of Assam, renowned for its bewitching natural bounties. I did my schooling from Assam and completed my graduation B.A.(Hons) from Calcutta University. Peeping Through My Window narrates the humble saga of my life, often punctuated with incidents that I believe readers would find both thrilling and interesting.
Sushma Tripathi is a published poet, short story writer, and translator. Her poems have appeared in notable anthologies such as Shabdon Ki Siharan and Sky Is the Limit, as well as in respected Hindi publications including Milap and Sahityanama.
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Genre: Autobiography
Language: Hindi
ISBN: 978-93-92281-53-2
Published: 25 October 2025
Pages: 110
Binding: Hardbound
Published by: Virasat Trade
पुस्तक ‘जागती स्मृतियाँ’ मानव जीवन की एक संघर्ष-पूर्ण गाथा है। यह पुस्तक नायिका के जीवन में आए हर्ष, शोक-विषाद, कठिन और संघर्ष भरे जीवन को अक्षरशः पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने में सक्षम है। जहां यह पुस्तक नायिका के विपरीत परिस्थितियों में उच्च मनोबल को दर्शाती है वहीं कैंसर जैसे रोग से लड़ने की उनकी जिजीविषा भी व्यक्त करती है। बाल्यकाल में ही मां के असाध्य रोग के कारण परिवार की जिम्मेदारियाँ, छोटे भाई की मानसिक बीमारी और मां की मृत्यु के बाद पिता सहित परिवार की देखभाल करना प्रसंशनीय है। पुरूष प्रधान समाज तथा उस समय की विधवाओं के अमानवीय जीवन का सटीक वर्णन मन को छू जाने वाला है। बालिका बुआ राधारानी को अमानुषिक कठोर विधवा जीवन की बाध्यता के कारण उनके हृदय और वाणी की कटुता में व्यक्त होती थी जोकि अस्वाभाविक नही कहा जा सकता है।
प्रेम करने वाला सच्चे जीवन-साथी की भूमिका भी उल्लेखनीय है। सुसंस्कृत संतान भी बुझारू व्यक्तित्व का परिणाम हैं। यह पुस्तक पाठकों की जिज्ञासा को बढ़ाने और शांत भी करने में सफल रहेगी।
Kaberi Chattopadhyay’s autobiography Peeping Through My Window chronicles the bittersweet moments of the author’s well-lived life and her battle through cancer. The characters we meet in the course of this autobiography are drawn from life and finely etched. The Telugu version of Kaberi Chattopadhyay’s autobiography is titled Aatu Potla Kaveri and the Bengali version of the book is Smritir Janala Diye
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